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Santal History संथाल जाति का इतिहास

Santal History संथाल इतिहास

Santal History संथाल जाति:- संथाल (संथालो) के उद्भव और विकास के संबंध में कहा जाता है कि संथालों का जन्म Hehedi-Pepedi देश में हुआ है। इनका पौराणिक लोक कथा के अनूसार Hehedi Pepedi Rebon Janam Lena, Khoj kaman Re Bon Khoj lena, Hararata Re Bon Hara lena, Sasa jobeda Re Bon Jat Talalen.

Hehedi  Pepedi में मानव के पुरवाज पिलचू हडाम और पिलचू भूड़ी का जन्म स्थल  है, इन दोनो में हंस और हस्नी (हंसों की जोड़ी) के दो (अंडा) सी हुवा था और उन्ही दोनो से मनवा वंस के नीव पड़ी है।

पिलचू दम्पति से सात पुत्र जनम हुवा Sendar, Sandom, Chare, Mane, Achare, Dela और Lita और सात पुत्री का जनम हुवा  Chith, Kapra, Hisi, Dumni, Dange, Pudge, और Naso.

इन दोनों ने अनजाने में Sudkuch जंगल के Chopakiya बरगद पेड़ के नीचे विवाह संपन्न किया उन्हीं के वंश को Hod(Santhal) संथाल या Kalkram में Kherawl संथाल कहा गया है।

Santali Lokh Geet

संथाल लोकगीत
Hehedi Pepedi रेबून जन्म लेना।
Khojkaman रेबून खोज लेना।
Hararata रेबून  हरा लेना।
Sasadabeda रेबून जाट ताहे लेना।

गीत के भावार्थ

हमारा जन्म Hehedi Pepedi अर्थात भूमध्य सागर के Seseli द्वीप में हुआ था।
हमारा खोज Khojkaman मतलब Kazakhstan ( कज़ाख़िस्तान ) में हुआ था।
हमारा वंश विस्तार Hararata का मतलब Harte अफगानिस्तान में हुआ था।
हमारा जाति का विभाजन Sasadabeda मतलब लोहित सागर के मैदान क्षेत्र में हुआ था।

पूर्वजों का Cay Campa नामक स्थान

Santal History संथाल जाति:- जब उनकी वंश अधिक बड़ तब यह लोग Sasadabeda(Lohit Sagar), Kandahare(Kandhar Afganistan), Chay Disom(Pakistan), Ayay Disom(Sindhu Nadi), Badole(Gujrat), Jarpe Disom, Ayre Disom, Koydadisom, Campa Disom में रहने लगे इन देशों में इन्होंने अनेक दिशाऔ में काफी प्रगति की थी।

उनके पूर्वजों का Cay Campa नामक स्थान पर सावर्ण युग था।

Sasadbeda Me Inhone  Kai Paris Gatra Vibhagit Kiye the Inke Lokkatha Ke Anusar.

Peter Bade Buta Re Tutub Kate, Sakam Bhetaw Yenl Kate Kin Bhujaw Keda, Khode Leka Katij Katij, Atana Buta Re Katha Kikin Jawra Keda, Sare Utar Sadi Sarjom, Sari Sarna Matlab Inhone Apni Gotra Or Upgotra Naamkaran Jiv Jantu, Pasu Panchi Tatha pead pawdhe ke anurup kiya.

भारत में तीसरी सबसे बड़ी जनजाति

भारत में तीसरी सबसे बड़ी जन जाति संथाल की जनजाति है। यह जन जाति मुख्य रूप से पश्चिम के बंगाल, बिहार, ओडिशा, झारखंड और असम राज्यों में है। वे पूर्व आर्य काल के हैं और भारत में ब्रिटिश शासन के समय में महान सेनानी थे।

संथालो के एक बैंटम झुंड का पता बांग्ला देश में भी लगाया जा सकता है। संथाल बहादुर और साहसी लोग थे। जिन्होंने 1855 में लॉर्ड कार्नवालिस के स्थायी बंदोबस्त के खिलाफ युद्ध छेड़ा था।

1850 में संथाल नायक सिद्धू और कनहू ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ समानांतर सरकार चलाने के लिए लग भग 10 हजार संथालों को जमा किया था। 1789 में अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाने वाले पहले संथाल नेता बाबा तिलका मांझी भी थे। पहले की जनगणना के अनुसार इनकी आबादी करीब 50,000 थी।

वैज्ञानिकों के अनुसार अनुमान लगाया गया है, कि झारखंड में संथाल के व्यक्तियों के पास उनके पूर्वजों के रूप में प्रोटो ऑस्ट्रेलॉइड थे, और ये तथा कथित प्रोटो ऑस्ट्रलॉइड्स भारत के पूर्वी सीमांत की ओर चलना शुरू कर चुके थे और वहीं बस गए थे। बहुत लोग उनको चरम जन जाति कह के बुलाते हैं।

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